डोगरी

Prashant DC-Dogri crusader

A Crusader who fought for Dogri language Dharam Chand Prashant passes away

A walking encyclopedia Dharam Chand Prashant, one of the eldest journalist of pre-Independence era from Jammu and Kashmir died here on Wednesday morning after a brief illness.He was 96. A former Rajya Sabha member DC Prashant is fondly remembered by many as a crusader who fought relentlessly for the inclusion of Dogri language in eighth schedule of the Indian Constitution. He was a walking encyclopedia on affairs of J&K, Dogra rulers, history of partition of India, and vast variety of subjects. One of the founding members of Dogri Sanstha he is also credited to have launched a sustained campaign for introduction of Dogri language in educational institutions up to post graduation level. Prashant began his career with Associated Press of India …

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Happy Rakshabandhan

“रखड़ी दा तयार” तयारें दा तयार रखड़ी दा तयार जो दरशाये प्रा-पैन दा प्यार

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Patriotic fervour grips ‪‎Jammu‬ on Independence Day

सूरज चंद्रमा धरती ते अम्बर प्यारा चप्पा चप्पा मुल्क मेरा, सुरगे शां न्यारा! नदियाँ,नाले,जंगल धारा मातृभूमि सबने तूं पैहले मीं अपना हिन्दोस्तां प्यारा!!

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Eid-jammu-dogri

Eid Mubarak

   

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Drama Artists demand Duggar Channel

A deputation of Doordarshan Approved Drama Artists’ Association (DADAA) called on Member Parliament, Jammu Poonch Constituency, Madan Lal Sharma yesterday. Led by President, DADAA Jagdish Singh Babli, the deputation apprised the MP regarding hardships being faced by the approved Drama Artists of Door Darshan Kendra (DDK), Jammu. Speaking on the occasion, Babli alleged that the approved Drama Artists of Jammu are jobless for the last two years, due to the negligence of the present Director, DDK Jammu and his subordinate staff. The association demanded the present working staff of DDK, Jammu may be replaced with the dogri knowing staff, for the proper projection and development of the Dogri culture, which is facing step motherly treatment these days. The association appealed …

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Father's day in Dogri Style_Jammu

Happy Father’s Day in Dogri Style

साथें-साथें जाना, कन्नै पापे दे, खेढें खेढें जाना, साथें पापे दे, बसता मूंढै पाना, साथें पापे दे, मैं पढ़ने गी जाना, साथें पापे दे, साथें साथें जाना, कन्नै पापे दै | Happy Father’s Day

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ऐ कलयुग है,कलयुग है मेरे मित्रों

कोई अपनी टोपी ते कोई अपनी पग्ग बेची दिंदा मिले जे पा चंगा ते जज अपनी कुर्सी बेची दिंदा पैसे दे बगैर आजकल करदा नि कोई काम पुलस आला ते चौका च बर्दी बेचीं दिंदा    फुकी दिंदे कुड़िये गी अपने सोरिये दे कार आले  जिस कुड़ी दे आस्ते प्य्यो अपनी गुर्दे बेचीं दिंदा  कोई ओवे जे नादान कुड़ी प्यार च कुर्बान ते उसदा आशिक ओदी वीडियो बेचीं दिंदा    ऐ सचे कलयुग है दोस्तों, हैरानी नि करो इथे ते कली, फल, बुट्टे ते फुल माली बेचीं दिंदा  उसी ते इंसान भी अखने की शर्म औंदी ऐ जेडा पैसे  आसते अपनी ती-पैन बेचीं दिंदा     जुआ है ज़िन्दगी मित्रो दिखी चलो  इक जमाना ओह भी है हा जिस वेल्ले  युधिष्ठर जुए …

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आयो आयो डोगरेयो

आयो आयो डोगरेयो, दिखो साड़े रवाज ते चक्खी लाओ स्वाद

आयो आयो डोगरेयो , आयो आयो डोगरेयो दिखो साड़े रवाज , ते चक्खी लाओ स्वाद   गलांदे ने चरोलु कन्ने बनदिया न चरोलियाँ जिन्नी भी बनी जान लगदिया न थोडियाँ खमीर लगे अट्टे कि ते बनी गए बब्बर चा ते चारा कने खाई जंदा सारा टब्बर लगे तड़का सागा कि ते बनी गया कसरोड़ ईधे कने पुख्ती जन्दा साडा अधा नंदरोड़ जिसले लगदा तड़का मेथरे दा ते बनी जन्दी मिरी जीबा च पानी आवा करदा तुहाडी ते मेरी   चाए ओवे ब्याह कोई , चाए ओवे कोई त्यहार बल्दी है रस्सो ते बनी जनदे क्युर खंड कने  खाओ पाए लाओ कने दयीं (दहीं) साड़े डोगरे दे पकवान ऐ बड़े मशहूर   ओवे कुसे दिया रीता ते बन्दी है सुंड जे …

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दुबदी डोगरी

पाशा भी मीठी ते मिसरी अंगर मिठड़े न अपने लोग गलांदे हे पहले कि कदू इस्सी राष्ट्रीय पाशा दा रुतवा थोग अज जदू मिली गया इसी इसदा सम्मान क्यों नि दिन्ने अस इस्सी इन्ना त्यान   स्क्कुले च ना कोई करन दिंदा गल- कथ , ना लगी दी कोई कताब , जे पूछो, कुथआ आई ते  के साडा इतिहास, कुस्से कोल नहीं इसदा जवाब दस्सो हा तुस्स डोगरेयो , पला चंगा है साडा साब-कताब …?   कार कुस्से दे चली जाओ या दिखी लाओ अपने ही नज़ारा करदे न माँ-पियो भी इस कोला विचार, ना सखांदे ते ना दिंदे बोलन डोगरी पला कोई पूछे , के माडा है करना अपनी “माँ ” कि प्यार , इए सखांदे साडे संस्कार दस्सो …

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जदु मै निक्का हुंदा हा

जदु मै निक्का हुंदा हा     शायद उसले दुनिया बड़ी बड्डी हुन्दी ही  मिक्की चेअता है मेरे करा कोला मेरा स्क्कूला दा रस्ता के के नई हा उथे आलू-टिक्की दे ठेल्ले , जलेबी दी दुकान , बर्फ दे गोले , और बड़ा कुछ उन उथे लबदा है मोबाइल शॉप , वीडियो पार्लर , फी बी सब कुछ वीरान है शायद दुनिया सिमटा करदी है   जदु मै निक्का हुंदा हा   शायद उसले तरकाले दा बेल्ला बड्डा उन्दा हा कदी अपने ते कदी गवांडीए दे कोठे ऊपर कई पेर गुडिया दुआना हो लाम्बिया साइकिल दी रैसा, हो बचपन दे खेड फी तरकाले आयिए थकिये चूर ओई जाना उन ओह तरकाला नि पौन्दिया दिन ते टलदा , पर सिदे रात …

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